Wednesday, December 17, 2008

जाने क्यों...
यादों के बवंडर में से
कुछ झिलमिलाते पल याद आए?
खामोश ज़बान पर
कुछ अनकहे से ख़याल आए

दूर कहीं
किसी जमाने की बात है
क्या हुआ था?
एक अरसा बीत गाया
वह अनजाना सा एहसास, खुशनुमा
रूह को जिसने छुआ

फिर अचानक
सब कुछ धुंधला सा हो गया

सदियों से कोशिश है
उस एहसास को पकड़ने की
पर रेत है...


शायद ,
कभी न ख़त्म होगी यह तलाश
शायद ,
एक बार ही होता है वह
एहसास ।









5 comments:

  1. toooo gud yaar.......m touched.....

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  2. सुंदर प्रस्तुति.
    आपकी कविता की आखरी पंक्तियो के लीये कुछ लिखा है:



    सोचुं में,
    क्या सच में,
    कीसी एहसास ने ऐसे छुआ था?
    या रूह को धोखा हुआ था!

    असीम है जो,
    वहां परम न खोजो;
    नज़र पाबंद थि, गहराई को देखा नही था,
    हां विरल, अज्ञानी रूह को धोखा हुआ था!

    [This is the first time I wrote in hindi, and my mother-tongue is not hindi, so plz forgive (but point out) flaws... ! :) ]

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  3. Thanks for the feedback Viral. Your writing is beautiful!

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