Tuesday, November 17, 2009

सावन की बूदों की रिमझिम झंकार
सुबह की ओस का चंचल स्पर्श
कच्ची अमिया की मीठी खटास
पुरवईया के झोंकों की भीनी सुगंध
यादों के बवंडर में टूटे पत्तों से
वो खूबसूरत पल, जैसे
पतझड़ के आँगन में ज़िन्दगी
उलाहना देने आई हो...

Wednesday, November 11, 2009

A flight of fancy
Or,
Is it the 'real' world
That I see
With my 'open' eyes?
Not a trick of my optic nerves
Is it?
They have a habit of playing mischief
Inviting me to see
The forbidden...