Saturday, October 16, 2010

दादी माँ



I was in Delhi for my graduate studies when Dadi Maa left us for her heavenly abode. Papa told me that the last words she spoke were: "Laagat hai Anu aai gai" (I feel Anu is here). I wish I was there when she breathed her last. This poem is for my Dadi Maa.


दादी माँ की
हथपोई रोटियों का
जवाब नही था

आँगन के चूल्हे में सिकीं
गरम-गरम हथपोइयों के कौर
हमारे मुहँ में ऐसे पिघलते
जैसे कंडी की धीमी आँच पर
घंटों तक सींझे, लाल दूध से बने
घी और मक्खन की महकती बूंदें

गर्मी की छुट्टी में
जब हम गांव जाते
तो आंखें सबसे पहले
दादी माँ को ढूंढ़तीं
दलान से लगे किंवाड़
से झाँक कर देखते
तो दादी माँ
अपनी सूती धोती पहने
या तो दही मथ रही होतीं
या फिर
आँगन में छन कर आई धूप में
खटाई डाल रही होतीं
हम जोर से चिल्लाते -
"दादी माँ, दादी माँ"
दादी माँ की आंखें चमक उठतीं
और हमेशा की तरह हँस कर कहतीं -
"लागत है अनु आइ गै"

फिर तो गर्मी की छुट्टी खूब मज़े से कटती
चाहे खरही पर चढ़ कर
कलमी पेड़ से आम तोड़ने की सनक हो
या भरी दोपहरी में छिछला खाने की ललक
चाहे गेहूं की देहरी में आम छिपाने की कोशिश
या फिर हथपोई पर सबसे ज़्यादा घी डलवाने की होड़
दादी माँ हर बार हमें बड़ों की डांट से बचातीं

हम बड़े हो गए
पढ़ने के लिए और दूर चले गए
धीरे-धीरे गांव छूट गया

सालों बाद फिर गांव जाना हुआ
खरही के पास वाला पेड़ अब नही था
घर की देहरी बँट गई थी
मिट्टी का चूल्हा तोड़ कर
छुटके बाबू और बड़के चाचा ने
गैस- सिलेंडर लगा लिया था

दलान के किंवाड़ से
अन्दर झांकने की हिम्मत न हुई
दादी माँ की यादों से भरा
वह आँगन अब सूना था...

9 comments:

  1. Thanks Div. It was emotional for me too...

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  2. oh man!nivedita, that was real awesome. I have never had an opportunity to live in a village except for a night or two in some villages of western UP, and till now I had never thought I would miss living in a village.

    This poem of yours made me realize the simple joys I have missed by spending most of my 51 years of life in Metros of India.

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  3. @Rakesh, Abhinandan and Crusader: Thanks for visiting! :-)

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  4. Hello Nivedita mujhe aapki yeh waali poem bahut jyada achhi lagi.......Ise pad kar mujhe apni dadi ki yaaad aa gai...... wo bhi mujhse bahut pyaar karti thi.... aap ki sari poems bahut hi laajawab hai ..... And aapka show mujhe bahut jyada pasand hai specially aapke expressions.... Keep it up......

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  5. it was something really really emotional Nivedita.... even I love my Daadi maa so much... & these lines made me cry. i was jus 1 year old whn my father passed away.... zindgi ne bahot kuch sikha diya hai. nivedita, evry1 can't write these kinda lines, u surely hv a golden heart. insaan kuch bhi ho jaye but apne emotions k aage mazboor hona hi padhta hai use. nwz all d best. tkcr.... - Dhananjay.

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  6. me royi toh nhi par ankhe bhar ayi
    mjhe aj bhi wo din yd h jb mene apni dadi ma ko kho diya tha tb me bhi itne karib hoke bhi unke paas nhi thi :'(

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